← ब्लॉग पर वापस जाएं
Member Stories

हरीश, 62, तलाक़शुदा, पुणे: शनिवार का शतरंज क्लब

Feb 24, 2026 1 मिनट पढ़ने में
हरीश, 62, तलाक़शुदा, पुणे: शनिवार का शतरंज क्लब

पुणे कोरेगाँव में एक शतरंज क्लब। 62 साल के हरीश तलाक़ के बाद वहाँ जाने लगे। वहीं मिलीं प्रीति।

पहले एक क़िस्सा। पुणे कोरेगाँव पार्क में हर शनिवार सुबह एक छोटा सा शतरंज क्लब लगता है। बीस-तीस लोग। चालीस से लेकर अस्सी साल तक। सभी शनिवार सुबह नौ बजे जमा होते हैं, चाय और खेल।

हरीश पहले-पहल वहाँ गए जुलाई 2023 में। तलाक़ उनका दो महीने पहले हुआ था। 28 साल की शादी। उनकी बेटी कनाडा में, बेटा बेंगलुरु में। अचानक घर बिलकुल ख़ाली।

क्लब का पहला दिन

"मैं सबसे कठिन फ़ैसला लेकर गया था," हरीश बताते हैं। "घर से निकलने का। हर शनिवार सुबह सोफ़े पर बैठकर अख़बार पढ़ता था। टीवी चलता रहता था। पत्नी के बिना वह सोफ़ा एक कब्र जैसा लगता था।"

पहले दिन उन्होंने कोई खेल नहीं खेला। सिर्फ़ बैठकर देखा। चाय पी। लोगों से "नमस्ते" बोला। दो घंटे बाद घर लौटे।

"घर लौटकर एक अजीब बात हुई। पहली बार दो महीने में मुझे भूख लगी। ठीक से भूख, जैसे पहले लगती थी।"

दूसरा शनिवार

दूसरे शनिवार वे वहीं गए। इस बार एक बूढ़े आदमी ने पूछा — "भाईसाहब, खेलेंगे?" उनका नाम था शर्माजी, 74 साल के, रिटायर्ड प्रोफ़ेसर।

हरीश ने पहला खेल हारा। बुरी तरह। शर्माजी हँसे और बोले: "28 साल शादी के बाद शतरंज नहीं खेला होगा। पत्नियाँ इसे समय की बर्बादी मानती हैं।"

यह एक हल्का मज़ाक़ था, मगर हरीश के लिए मोड़ था। किसी ने उनकी तलाक़ पर तरस नहीं खाया, उन्हें "बेचारा" नहीं कहा। बस शतरंज की बात की।

तीन महीने बाद

तीन महीने तक हर शनिवार हरीश जाते रहे। धीरे-धीरे सबसे परिचित हुए। फिर अक्टूबर के एक शनिवार एक नई सदस्य आईं।

उनका नाम था प्रीति। 58 साल की। विधवा, पति को दो साल पहले खोया था। पुणे के ही एक कॉलेज में बंगाली पढ़ाती थीं।

प्रीति को शतरंज बचपन से आता था। उनके पिता बहुत अच्छा खेलते थे। पति के जाने के बाद उन्होंने सोचा कि फिर शुरू करें।

पहले शनिवार प्रीति ने शर्माजी को हराया। शर्माजी ने हरीश की तरफ़ देखकर हँसते हुए कहा — "भाईसाहब, आज आपकी बारी।"

पहला खेल

हरीश ने प्रीति के ख़िलाफ़ पहला खेल पौन घंटे में हारा। "वे अच्छी खिलाड़ी थीं। मैंने लंबे समय बाद किसी से वास्तव में कुछ सीखा।"

खेल के बाद चाय पर बात हुई। प्रीति ने कहा: "आप पहले दिन से यहाँ नियमित हैं?"

"मुझे तलाक़ हुए छह महीने हो गए," हरीश ने कहा। "घर से निकलने के लिए आया था शुरू में।"

प्रीति ने बस इतना कहा: "मैं समझती हूँ। मेरे पति गए दो साल हुए।"

तीसी तरफ़ से यह बातचीत छोटी थी। मगर दोनों के लिए बड़ी थी। क्योंकि उन्होंने एक दूसरे को "पूर्व जीवनसाथी वाले" के रूप में देखा, "असफल" के रूप में नहीं।

कैफ़े की शुरुआत

अगले महीने शतरंज के बाद दो लोगों ने सुझाव दिया — "चलो, कोरेगाँव की उस नई कैफ़े में कुछ खाते हैं।" समूह में छह-सात लोग गए।

प्रीति और हरीश संयोग से पास बैठे। बातचीत खिंचती गई — उनके बच्चे, उनके शिक्षण, हरीश की बैंकिंग की नौकरी, दोनों के बंगाली खाने की पसंद।

घर लौटते समय प्रीति ने कहा: "अगले शनिवार आप पहले आ जाएँ तो हम एक खेल खेल लें शुरू में। आप मुझसे थोड़ा सीखेंगे।"

यह पहला स्पष्ट निमंत्रण था। हरीश ने कहा: "ज़रूर।"

छह महीने — धीमी गति

अगले छह महीने हरीश और प्रीति शनिवार के पहले नौ बजे के बदले आठ बजे मिलने लगे। एक खेल दोनों में। चाय। फिर क्लब।

फिर बुधवार के कॉलेज के बाद प्रीति कभी-कभी उनके फ़्लैट के पास की कैफ़े आतीं। फिर शुक्रवार रात कभी-कभी डिनर।

"हम जल्दी में नहीं थे," हरीश कहते हैं। "मैं 62 का था, वे 58 की। हमने अपने-अपने फ़्लैट रखे। मिलते रोज़ नहीं थे। मगर हर हफ़्ते तीन-चार दिन मिलते।"

बच्चों की मिलाकर

आठ महीने बाद हरीश ने कनाडा वाली बेटी को बताया। उन्होंने वीडियो कॉल पर प्रीति से मिलवाया। बेटी ने ख़ुशी जताई — "पापा, अच्छा है।" बेटा मुश्किल था। उसने एक हफ़्ते तक फ़ोन नहीं उठाया।

फिर बेटा बेंगलुरु से आया। हरीश ने उसे प्रीति से मिलवाया, डिनर पर। बेटे ने दो घंटे बात की, ज़्यादातर ग़ौर से। अंत में उसने हरीश से अकेले में कहा — "पापा, वे अच्छी हैं। मगर आप माँ के बारे में क्या सोचते हैं?"

हरीश ने कहा: "तुम्हारी माँ और मैंने 28 साल बिताए। वो हमारा हिस्सा रहेगी। मगर अब नया अध्याय है।" बेटा कुछ देर चुप रहा फिर सहमत हो गया।

आज दो साल बाद

आज हरीश और प्रीति एक ही कोरेगाँव इलाक़े में दो अलग फ़्लैट में रहते हैं। LAT व्यवस्था। हर शनिवार शतरंज क्लब। कुछ दिन साथ, कुछ अलग।

हरीश कहते हैं: "जब तलाक़ हुआ था, मुझे लगा था कि मेरी भावनात्मक ज़िंदगी ख़त्म हो गई। 62 में कौन किसी से मिलेगा। मगर ऐसा नहीं हुआ।"

"और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं प्रीति से मिला क्योंकि मैं शतरंज खेलने गया था, साथी ढूँढने नहीं। अगर मैं 'मुझे कोई चाहिए' की भूख से गया होता, तो शायद यह न होता।"

पाठकों के लिए क्या सीख

हरीश की कहानी से तीन बातें।

अगर आप पुणे में हैं और कोरेगाँव के शतरंज क्लब के बारे में पूछेंगे, हरीश और प्रीति अब भी वहीं हैं, हर शनिवार सुबह नौ बजे। नए लोगों का स्वागत है।

संबंधित पोस्ट

अनन्या, 22, गोवा अंजुना: डीएम से पहली ट्रिप तक

Apr 02, 2026
लिस्बन-मुंबई डिजिटल नोमैड लव स्टोरी

लिस्बन-मुंबई डिजिटल नोमैड लव स्टोरी

Mar 31, 2026
संध्या और राजेश: मसूरी के संगीत क्लब में मिले

संध्या और राजेश: मसूरी के संगीत क्लब में मिले

Mar 17, 2026

Member Stories से और देखें

सब देखें →