एक उपमा से शुरू करती हूँ। डांस फ्लोर एक पुरानी किताब की तरह है। पहली बार खोलने पर अजीब लगती है। दूसरी बार धूल उड़ती है। तीसरी बार कुछ पंक्तियाँ पहचान में आती हैं। और फिर एक दिन वह किताब आपकी अपनी हो जाती है।
50 के बाद सोशल डांस कक्षा में जाना बिलकुल ऐसा है।
सोशल डांस क्या है
पहले कुछ साफ़ करें। यहाँ "सोशल डांस" का मतलब बॉलीवुड डांस नहीं। न ही शादी में ढोल पर नाचना।
सोशल डांस का अर्थ — जोड़े में किया जाने वाला नृत्य जिसकी अपनी भाषा है, अपना ढाँचा है, और जिसे सीखा जाता है।
- सालसा। क्यूबन और प्यूर्टो रिकन मूल। 50+ के लिए सबसे सुलभ।
- बाचाटा। डोमिनिकन। धीमी, रोमांटिक।
- बॉलरूम। वाल्ट्ज़, फॉक्सट्रॉट, रूम्बा। शास्त्रीय।
- स्विंग/लिंडी हॉप। 1930 का अमेरिकी, जीवंत।
- कथक-सामाजिक मिश्रण। भारत में नया।
50+ को क्यों
डांस शरीर को जगाता है, यह पता है। मगर इसके कुछ और कारण हैं जो ख़ास 50+ के लिए हैं।
छूने का वापस आना। विधुरता या तलाक़ के बाद एक बड़ी कमी छुअन की है। डांस में आप किसी को छूते हैं — पेशेवर ढाँचे में। हाथ, कमर, कंधा। यह गैर-यौन, मगर मानवीय है।
पहली कुछ कक्षाओं में यह अजीब लगता है। मगर जल्दी ही शरीर यह सिखाता है कि छुअन जीवन का हिस्सा है, ख़तरा नहीं।
दिमाग़ का व्यायाम। डांस में कदमों की गिनती, साथी की लय, संगीत की ताल — सब एक साथ। यह दिमाग़ की नई कोशिकाएँ बनाता है। वृद्धावस्था में डिमेंशिया से बचाव में मदद करता है, शोध कहता है।
सामाजिक जाल। डांस कक्षाओं में आप हर हफ़्ते वही लोगों से मिलते हैं। तीन महीने में एक समूह बन जाता है। रिश्ते बनते हैं।
भारत में जगहें
पिछले 10 साल में भारतीय शहरों में सोशल डांस काफ़ी बढ़ा है।
मुंबई — सालसा की राजधानी। बांद्रा वेस्ट, लोअर परेल, अंधेरी में कई स्टूडियो। कुछ विशेष "50+ beginner" कक्षाएँ।
दिल्ली — हौज़ ख़ास, ग्रेटर कैलाश, गुड़गाँव साइबर सिटी में सालसा और बाचाटा। दिल्ली सालसा कम्युनिटी सक्रिय है।
बेंगलुरु — इंदिरानगर और कोरमंगला में स्टूडियो। आईटी कर्मचारियों का समूह बड़ा मगर कुछ 50+ भी आते हैं।
पुणे — कोरेगाँव पार्क में स्टूडियो। ज़्यादातर शिक्षक मुंबई से।
चेन्नई — कम, मगर बेसंत नगर और अलवरपेट में कुछ। तमिल संगीत पर प्रयोग भी।
कोलकाता — बॉलरूम की पुरानी परंपरा है। बालिगंज में क्लब।
हैदराबाद — बंजारा हिल्स में बढ़ रहा है।
पहली कक्षा
पहली कक्षा का डर सबसे बड़ा है। "मैं 55 की हूँ, मैं बेवकूफ़ दिखूँगी।" यह सबका डर है।
सच यह है — ज़्यादातर अच्छी सालसा कक्षाओं में कोई भी पहली बार आने वाले को नहीं हँसता। क्योंकि हर कोई कभी पहली बार आया था।
एक बात कीजिए — पहली कक्षा में सबसे पुराने छात्र से पूछिए: "आप कब से आ रही हैं?" और उसकी कहानी सुनिए। यह तनाव कम करता है।
कपड़े — ढीले मगर कुरता-सलवार जैसी पारंपरिक चीज़ नहीं। साधारण टी-शर्ट/कुर्ता और जीन्स ठीक। जूते — हल्के, जिन्हें पहनकर फ़र्श पर घूम सकें।
पार्टनर का सवाल
"मेरे पास पार्टनर नहीं है, तो कैसे जाऊँगा?" — यह आम डर है।
सोशल डांस की ख़ासियत यही है कि पार्टनर की ज़रूरत नहीं। कक्षा में शिक्षक सबको एक साथ रखते हैं, और हर गाने पर पार्टनर बदलते हैं। आप एक कक्षा में 10-12 लोगों के साथ नाचते हैं।
यह जान-बूझकर किया जाता है। ताकि कोई किसी के साथ "बँधा" न रहे, और सभी सीखें।
पुरुष और महिला — अनुपात
सच्चाई यह है — भारत में सोशल डांस कक्षाओं में अक्सर पुरुष कम होते हैं। महिलाओं का आना आसान है।
अगर आप 50+ पुरुष हैं और हिम्मत कर लें — तो डांस कक्षा आपके लिए सुनहरा मौक़ा है। वहाँ आपकी "माँग" होगी।
अगर आप महिला हैं — तो धैर्य। कभी-कभी पार्टनर कम होने पर कुछ महिलाएँ एक-दूसरे से नाचती हैं। यह भी सीखने का अच्छा तरीक़ा।
सामाजिक नृत्य शाम
कक्षाओं के अलावा "सोशल" होती हैं — हफ़्ते में एक शाम, क्लब या रेस्तराँ में, जहाँ सिखाए हुए छात्र इकट्ठे होकर नाचते हैं। शिक्षक नहीं, बस गाने और लोग।
मुंबई में हर बुधवार बांद्रा की एक सालसा शाम है। दिल्ली में गुरुवार हौज़ ख़ास में। पुणे में शनिवार।
यहाँ असली जुड़ाव बनते हैं। कोई क्लास का औपचारिक ढाँचा नहीं। बस नाच, फिर बातचीत, फिर फिर नाच।
एक पाठिका की बात
हैदराबाद बंजारा हिल्स से एक 52 साल की पाठिका ने लिखा:
"मेरे तलाक़ को एक साल हुआ था। दोस्त ने ज़बरदस्ती मुझे सालसा क्लास में ले गई। पहली तीन क्लास में मैं रोई — कक्षा के बाद, गाड़ी में। क्योंकि मेरे शरीर को किसी मर्द के हाथ 27 साल बाद छू रहे थे।
"फिर चौथी क्लास में कुछ बदला। मैं रोज़ नाचने लगी। छह महीने बाद मेरा शरीर जीवित लगने लगा।
"मैं किसी से नहीं मिली डांस के कारण, मगर मुझे मिला — अपना आप। पिछले साल मैंने एक अच्छे व्यक्ति से मिलकर रिश्ता शुरू किया है। वे भी थोड़ा नाचते हैं।"
अपेक्षा और वास्तविकता
सोशल डांस को "डेटिंग का विकल्प" मत बनाइए। यह ख़ुद में एक गतिविधि है। कुछ लोग मिलते हैं, कई नहीं। मगर डांस आपकी रोज़ की ज़िंदगी बेहतर बनाता है, चाहे रिश्ता हो या न हो।
पहला क़दम
अपने शहर में Google पर खोजिए: "[शहर] salsa beginners class" या "[शहर] ballroom dance for 50+"। तीन-चार विकल्प मिलेंगे।
अधिकतर स्टूडियो पहली क्लास मुफ़्त या बहुत सस्ती देते हैं। एक बार जाइए।
अगर वहाँ का माहौल अच्छा लगा — उम्र के हिसाब से लोग, शिक्षक धीरज रखने वाले, संगीत मनमोहक — तो continue कीजिए।
पहले दो महीने अजीब होंगे। तीसरे महीने में आप किसी पुराने "आप" से मिलेंगे जिसे आप भूल चुके थे। उसी "आप" से रिश्ते शुरू होते हैं।